British policy towards Indian princely states – भारतीय रियासतों के प्रति ब्रिटिश नीति

British policy towards Indian princely states

British policy towards Indian princely states – भारतीय रियासतों के प्रति ब्रिटिश नीति भारतीय रियासतों के साथ अंग्रेजों के संबंध दो चरणीय नीति से निर्देशित थे- पहला, साम्राज्य की रक्षा के लिये उनसे संबंधों की स्थापना एवं उनका उपयोग तथा दूसरा, उन्हें पूर्णतया साम्राज्य के अधीन कर लेना (अधीनस्थ संघीय नीति)। भविष्य में ब्रिटिश शासन … Read more

गांधी जी ने आंदोलन वापस क्यों लिया

गांधी जी ने आंदोलन वापस क्यों लिया

गांधी जी ने आंदोलन वापस क्यों लिया     गांधी जी ने महसूस किया कि भारतीयों ने अभी अहिंसा के सिद्धांत को अच्छी से नहीं सीखा है या पूर्ण रूप से वे उसे नहीं समझ सके हैं। उन्हें लगा कि आंदोलन की बागडोर उनके हाथों से निकलकर हिंसक हाथों में जाने वाली है। उनका मानना … Read more

गांधी जी का हरिजन अभियान एवं जाति संबंधी विचार

गांधी जी का हरिजन अभियान एवं जाति संबंधी विचार

गांधी जी का हरिजन अभियान एवं जाति संबंधी विचार     साम्प्रदायिक अधिनिर्णय द्वारा भारतीयों को विभाजित करने तथा पूना पैक्र हिंदुओं से दलितों को पृथक करने की व्यवस्थाओं ने गांधी जी को बुरी आहत कर दिया था। फिर भी गांधी जी ने पूना समझौते के प्रावधानों का तरह पालन किये जाने का वचन दिया। … Read more

भारत में डचों का पतन: Decline of the Dutch in India

भारत में डचों का पतन

भारत में डचों का पतन: Decline of the Dutch in India   लगभग तीन शताब्दियों तक पूर्वी द्वीप समूहों पर डचों का अधिकार रहा, परंतु अंग्रेजों ने भारत में उन्हें स्थापित नहीं होने दिया। जिस शक्ति के साथ डचों ने पुर्तगालियों को पराजित किया था, वह शक्ति अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ाई में काम नहीं आ … Read more

1858 के बाद से स्वतंत्रता प्राप्ति तक संवैधानिक विकास: Constitutional development from 1858 till independence

1858 के बाद से स्वतंत्रता प्राप्ति तक संवैधानिक विकास

1858 के बाद से स्वतंत्रता प्राप्ति तक संवैधानिक विकास   रभातीय परिषद अधिनियम, 1861 गवर्नर जनरल (वायसराय) की कार्यकारी परिषद में एक पांचवां सदस्य, न्यायविद था”, शामिल किया गया। अब परिषद में गृह, सैन्य, राजस्व, विधि “कानूनी पेशे का एक भद्र पुरुष, जो तकनीकी अधिवक्ता की बजाय एक और वित्त सदस्य थे। सेना का सेनापति … Read more

भारत के पड़ोसी देशों से संबंध: Relations with India’s neighboring countries

भारत के पड़ोसी देशों से संबंध

भारत के पड़ोसी देशों से संबंध ( भारत एवं पाकिस्तान )   भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध सदैव ही कटु रहे हैं, और इसका कारण पाकिस्तान और भारत के विभाजन के तरीके में निहित है। 1947 के विभाजन से दोनों ही देशों के सम्मुख कुछ नई समस्याएं खड़ी हो गई। दोनों देश अस्त्रों की … Read more

भारत-पाकिस्तान युद्ध: India Vs pakistan Kargil

भारत-पाकिस्तान युद्ध

भारत-पाकिस्तान युद्ध   1965 में, भारत ने पाकिस्तान की ओर से युद्ध के खतरे का सामना किया। 1958 में सैन्य तख्तापलट के माध्यम से जनरल मोहम्मद अयूब खान पाकिस्तान की सत्ता पर काबिज हो गए, और बलपूर्वक राष्ट्रपति इस्कंदर मिर्जा को अपदस्थ कर स्वयं राष्ट्रपति पद हथिया लिया। ऐसी स्थिति में अमेरिका पाकिस्तान को पूरी … Read more

हरित क्रांति और श्वेत क्रांति का बीजारोपण

हरित क्रांति और श्वेत क्रांति का बीजारोपण

हरित क्रांति और श्वेत क्रांति का बीजारोपण   भारत उस समय भोजन की कमी से जूझ रहा था और स्थितियां बेहद विकट थीं, जब शास्त्री जी ने सी. सुब्रमण्यम को खाद्य एवं कृषि मंत्री के तौर पर अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया। शास्त्री जी ने हरित क्रांति की नींव डालने में अपने मंत्रियों का पूरा … Read more

1985 के आम चुनाव

1985 के आम चुनाव 

1985 के आम चुनाव    अक्टूबर 1984 में प्रधानमंत्री के पद पर नियुक्त किए गए राजीव गांधी ने समय इनका आयोजन दिसंबर 1984 में होना था। कांग्रेस (आई) ने 400 से अधिक पूर्व चुनावों की सिफारिश की। जनवरी 1985 में आम चुनाव कराए गए, जबकि लोक सभा सीट जीतकर ऐतिहासिक जीत हासिल की, क्योंकि स्वतंत्रता … Read more

1858 के बाद से स्वतंत्रता प्राप्ति तक संवैधानिक विकास

1858 के बाद से स्वतंत्रता प्राप्ति तक संवैधानिक विकास

1858 के बाद से स्वतंत्रता प्राप्ति तक संवैधानिक विकास   भारतीय परिषद अधिनियम, 1861 गवर्नर जनरल (वायसराय) की कार्यकारी परिषद में एक पांचवां सदस्य, न्यायविद था”, शामिल किया गया। अब परिषद में गृह, सैन्य, राजस्व, विधि “कानूनी पेशे का एक भद्र पुरुष, जो तकनीकी अधिवक्ता की बजाय एक और वित्त सदस्य थे। सेना का सेनापति … Read more