आधुनिक भारतीय इतिहास के स्रोत

इतिहास ( History ) शब्द ग्रीक शब्द हिस्टोरिया ( Historiya ) से लिया गया है जिसका अर्थ है जांच – पड़ताल के माध्यम से सूचना या ज्ञान प्राप्ति या जांच, इतिहास ,अभिलेख, से हासिल अधिगम या जानकारी | जैसा कि हम जानते हैं कि इतिहास सतीत में मानव प्रयास एवं घटनाओं से संबंध होता है ,
जो विचारों स्थानों एवं रीति-रिवाजों के विकास के साथ अंत ग्रुप हित होता है | इतिहास में कालक्रम स्थिति में क्रमानुसार घटित घटनाएं संगलन होता है परंतु कुछ भी बांटा हुआ नहीं है इसमें केवल परिवर्तन ही नहीं अपितु निरंतर आता भी है क्योंकि वर्तमान में भविष्य की घटनाएं तथा विचार अतीत से प्रभावित होते हैं फिर चाहे विचारों में समय के साथ परिवर्तन क्यों ना गया हो |
अतीत का अध्ययन केवल तभी किया जा सकता है जब उससे संबंधित आंकड़ों जानकारियों के कुछ स्रोत उपलब्ध हो | इतिहास के अध्ययन के लिए अभिलेख स्थापत्य कला तथा साहित्य कार्य कुछ महत्वपूर्ण स्रोत है,जिनमें कथा साहित्य मौखिक कहावतें और चित्रकलाओ के अलावा समरण , जीवनिया और यात्रा – वृतांत शामिल है |
18 वीं शताब्दी 20वीं शताब्दी के भारत का अध्ययन करने के लिए ऐतिहासिक सामग्री प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है |
आधुनिक भारतीय इतिहास के स्रोत
पूरालेखीय सामग्री
आधुनिक भारत के इतिहास के निर्माण में राज्य की अभिलेखों विभिन्न स्तरों पर सरकारी अभीकरनों के दस्तावे – को सर्वोच्च प्राथमिकता दिए जाने की आवश्यकता है | पूरालेखीय सामग्री ऐसे दस्तावेज हैं ,जिन्हें कोई संगठन ,लोग प्राधिकारी , संस्था, व्यवसाय या परिवार अपने कार्यों के दौरान तैयार करता है ,और जिन हैं तत्वपश्चातवरती ऐतिहासिक अनुसंधान में या भविष्य के कार्यों के नियोजन में संदर्भ के लिए उनके अधिकारों एवं गतिविधियों के प्रमाण के तौर पर सुरक्षित रखा जाता है|
ईस्ट इंडिया कंपनी के अभिलेखों ने 1600 से 18 सो 57 की कला विधि के दौरान की व्यापारी के दशाओं का विस्तृत वर्णन प्रदान किया | यह सत्य है कि ब्रिटेन की वाणिज्य कंपनी ने हजारों मील दूर एक बड़े क्षेत्र पर अपनी राजनीति के सर्वोच्चता स्थापित की , जिसके लिए एक प्रकार के प्रशासन की आवश्यकता थी जो पूरी तरह कागजों पर था प्रत्येक के नीति लिखित में होती थी और प्रत्येक व्यवसाय एवं लेनदेन प्रशासन परामर्श पर करवाई गुप्त पत्रों तथा अन्य पत्राचार के माध्यम से होता था |
जिसके परिणाम स्वरूप ऐतिहासिक सामग्री की मात्रा में कल्प नीति वृद्धि हुई | राजकीय अभिलेख है निदेशक मंडल और बोर्ड ऑफ कंट्रोल से संबंध है अभिलेखों के अतिरिक्त जिले से लेकर सर्वोच्च सत्ता तक , प्रशासन के सभी स्तनों को शामिल करते थे |
जब ब्रिटिश महारानी क्राउन ने प्रशासन भारती संभाला तो उसने भी बड़ी मात्रा में विभिन्न तरीकों के राजकीय अभिलेख सुरक्षित रखें | इन अभिलेखों का प्रशिक्षण करके हम चरण वार प्रत्येक घटना का विकास को समझ सकते हैं और नीति निर्माताओं के मनोविज्ञान सहित निर्णय की प्रक्रिया का अनुगमन कर सकते हैं |
इन अभिलेखों के अतिरिक्त ,अन्य यूरोप ईस्ट इंडिया कंपनी पुर्तगाली दक्ष एवं फ्रांसीसी के अभिलेख भी 17वीं और 18वीं शताब्दी के इतिहास के सृजन हेतु उपयोगी है | प्राथमिक तौर पर यह आर्थिक इतिहास की दृष्टि से महत्वपूर्ण है लेकिन राजनीति अवस्था के बारे में भी इनके काफी कुछ प्राप्त किया जा सकता है |
व्यापक तौर पर आधुनिक काल के लिए राजकीय अभिलेखों की चार श्रेणियां है 1 केंद्र सरकार के पुरालेख 2 राज्य सरकार के पुरालेख 3 मध्यवर्ती एवं अधीनस्थ प्राधिकरण के अभिलेख और 4 न्यायाधीश न्याय के अभिलेख हैं इनके अतिरिक्त विदेशों में भी निजी अभिलेख एवं अभिलेख यह स्रोत उपलब्ध है ब्रिटिश काल के कुछ प्रकाशित अभिलेख भी है जो आधुनिक भारतीय इतिहास के विद्यार्थियों के लिए मूल्यवान सूचना प्रदान करते हैं |